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लैलूंगा क्षेत्र में 22 धान के दलालों की चिन्हांकित गाड़ियों को पास जारी किए जाने का मामला गरमाया, प्रशासनिक सांठगांठ

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27/11/2025


**लैलूंगा क्षेत्र में 22 धान दलालों की चिन्हांकित गाड़ियों को पास जारी किए जाने का मामला गरमाया,

्रशासनिक सांठगांठ के आरोपों से ग्रामीणों में बढ़ी नाराज़गी**

लैलूंगा, रायगढ़। सीमावर्ती क्षेत्रों में अवैध धान परिवहन पर रोक लगाने के दावों के बीच लैलूंगा में नया विवाद खड़ा हो गया है। क्षेत्र में 22 धान दलालों की गाड़ियों को विशेष पास जारी किए जाने की जानकारी सामने आने के बाद ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। आरोप लग रहे हैं कि यह पूरा मामला प्रशासन और दलालों के बीच गहरी सांठगांठ का परिणाम है।

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, ओडिशा राज्य से लैलूंगा की सीमा में लगातार अवैध धान की आवक बढ़ रही है। बताया जा रहा है कि जिन वाहनों को पास जारी किए गए हैं, वे अक्सर देर रात या तड़के सुबह सीमा से अंदर प्रवेश कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि इन वाहनों की न तो सही तरीके से जांच होती है और न ही कोई रजिस्टर में उनका उल्लेख मिलता है। इससे यह संदेह और गहरा जाता है कि कुछ अधिकारियों द्वारा जानबूझकर इन्हें संरक्षण दिया जा रहा है।

इसी बीच क्षेत्र के किसानों ने चिंता जताई है कि बाहर से आने वाले इस अवैध धान के कारण स्थानीय उपज की कीमतों पर सीधा असर पड़ रहा है। किसानों का कहना है कि जब बाहरी धान बड़े पैमाने पर स्थानीय बाजारों में उतरता है, तो मिलर्स और व्यापारी उनकी फसल को उचित दाम देने से कतराते हैं। इससे उनकी सालभर की मेहनत पर पानी फिर जाता है।

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पूरे मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका आरोप है कि पास जारी करने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और कुछ चुनिंदा दलालों को ही लाभ पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन अगर ईमानदारी से कार्रवाई करना चाहे तो ऐसे नेटवर्क को एक-दो दिनों में खत्म किया जा सकता है, लेकिन मिलीभगत के कारण यह अवैध धंधा लगातार फल-फूल रहा है।

इस मुद्दे पर विपक्षी दलों ने भी प्रशासन को कटघरे में खड़ा किया है। उनका कहना है कि यह सिर्फ अवैध व्यापार का मामला नहीं, बल्कि स्थानीय किसानों के अधिकारों का प्रश्न है। उन्होंने मामले की उच्च स्तरीय जांच, संबंधित अधिकारियों के निलंबन और अवैध धान परिवहन पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

इधर, बढ़ते विवाद और आरोपों के बावजूद प्रशासन की ओर से किसी भी अधिकारी का आधिकारिक बयान अब तक सामने नहीं आया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि जिलास्तर पर रिपोर्ट तलब की गई है और मामले की प्राथमिक जांच शुरू कर दी गई है।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस अवैध गतिविधि पर रोक नहीं लगी, तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। फिलहाल पूरा लैलूंगा क्षेत्र इस मुद्दे को लेकर चर्चा में है और लोग प्रशासन की अगली कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं।


लोकमत 24 इस मामले पर लगातार नजर रखगा और आपको आगे की जानकारी देता रहेगा।

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By Rakesh Jaiswal

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