Breaking News
Fri. Feb 6th, 2026

अनजान ने बचाई जान: लैलुंगा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल एम्बुलेंस नहीं न ही टिटनेस का इंजेक्शन

शेयर करें

दिनांक: 22 दिसंबर 2024 लैलुंगा:

 लैलूंगा में प्रेस एंड मीडिया वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यक्रम के दौरान एक घटना घटी जिसने क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। एसोसिएशन के उपाध्यक्ष विकास कुमार किसी काम से कुंजरा गए थे, जहां उन्होंने देखा कि तीन बाइक्स आपस में टकराकर दुर्घटनाग्रस्त हो गई थीं। तीन लोगों को चोटें आईं, जिनमें से एक की हालत गंभीर थी।

घटनास्थल पर तमाशबीनों की भीड़ लगी हुई थी, लेकिन मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। विकास कुमार ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को कॉल किया, लेकिन वह उपलब्ध नहीं थी। उन्होंने 112 और 100 नंबर पर भी संपर्क किया, लेकिन सहायता नहीं मिली।

मदद के लिए किया संघर्ष:

ऐसी स्थिति में विकास कुमार ने खुद ही घायल व्यक्ति को अस्पताल ले जाने की कोशिश की। तभी एक महिला ने अपनी बोलेरो गाड़ी रोककर मदद की। घायल को लैलुंगा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक इलाज शुरू हुआ।

लैलुंगा अस्पताल की कमी:

लैलुंगा अस्पताल में टिटनेस के इंजेक्शन उपलब्ध नहीं थे। विकास कुमार ने निजी मेडिकल स्टोर से इंजेक्शन खरीदकर दिया। डॉक्टर मिस पैंकरा ने बताया कि अस्पताल में दवाइयां सीमित स्टॉक में ही आती हैं। गंभीर चोटों की वजह से घायल को सीटी स्कैन की जरूरत पड़ी और उन्हें रायगढ़ अस्पताल रेफर कर दिया गया।

लैलूंगा अस्पताल में भर्ती करने के बाद कुछ देर में मरीज की पत्नी आईं, उनके साथ एक छोटी सी बच्ची भी थी। उन्होंने बताया कि मरीज का नाम युतन भगत है और वह नवापारा, लैलूंगा के निवासी हैं, जो अब भद्रापारा में रहते हैं। उनके घर में कमाने वाले केवल वही हैं।

रायगढ़ अस्पताल की व्यवस्था:

रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में भी मरीज का इलाज संभव नहीं हो सका। प्राथमिक इलाज के बाद मरीज को रायपुर रेफर कर दिया गया। यहां सवाल यह उठता है कि रायगढ़ जैसे बड़े अस्पताल में भी इलाज क्यों नहीं हुआ?  रायपुर ले जाते समय एंबुलेंस ड्राइवर ने मरीज को सलाह दी कि सरकारी अस्पताल के बजाय किसी निजी अस्पताल में भर्ती करवाएं। यह सवाल खड़ा करता है कि एंबुलेंस ड्राइवर का निजी अस्पतालों के साथ कोई कमीशन सेटअप तो नहीं है।

व्यवस्था पर बड़े सवाल:

  • 1. लैलुंगा अस्पताल: यहां टिटनेस के इंजेक्शन जैसी बुनियादी दवाइयां क्यों नहीं हैं?
  • 2. एम्बुलेंस सेवा: लैलुंगा में 108 या 112 एंबुलेंस सुविधा क्यों उपलब्ध नहीं है?
  • 3. रायगढ़ अस्पताल: इतने बड़े मेडिकल कॉलेज में जरूरी सुविधाएं और विशेषज्ञ क्यों नहीं हैं?
  • 4. निजी अस्पताल की सिफारिश: एंबुलेंस ड्राइवर का निजी अस्पताल की ओर झुकाव क्यों है?

इस घटना ने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की खामियों को उजागर किया है। यह सरकार और प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय है। अगर तत्काल कदम नहीं उठाए गए, तो आम नागरिकों को इस तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता रहेगा।

अपील:

सरकार और प्रशासन से आग्रह है कि लैलुंगा और रायगढ़ जैसे क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाया जाए ताकि जनता को समय पर इलाज मिल सके।


लोकमत 24 इस मामले पर लगातार नजर रखेगा और आपको आगे की जानकारी देता रहेगा।

लैलूंगा अस्पताल में वसूली और भ्रस्टाचार की जानकारी देनें के लिए संपर्क करें |
प्रधानमंत्री आवास योजना में हो रहे भ्रष्टाचार और घूसघोरी की जानकारी देने के लिए संपर्क करें

शेयर करें

By Rakesh Jaiswal

Lokmat24 News  एक विश्वसनीय न्यूज़ प्लेटफॉर्म है जो आपको छत्तीसगढ़ की ताज़ा और सटीक ख़बरें प्रदान करता है। हमारा उद्देश्य सच्चाई को आप तक पहुंचाना है | Contact - 9424188025

Related Post