लैलूंगा 02.04.2025 अवैध लाल ईंट के चक्कर में सरकारी संपत्ति नष्ट हो रही है ,सरकारी अधिकारी मौन



ैलूंगा l केशला ,केराबाहार ,पहाड़लुड़ेग और मोहनपुर मैं लाल ईंट बनाने के चक्कर में राजस्व विभाग की सरकारी संपत्ति में पेड़ों को काटे जा रहे हैं यहां तक की गांव की कई जंगली क्षेत्र नष्ट हो जा रही है इसे शासन प्रशासन को कोई ध्यान नहीं है। वन विभाग के अधिकारी कर्मचारी भी मौन है वन विभाग को ध्यान देना चाहिए कि जंगलों की कटाई अंधाधुन हो रही है। वन विभाग का कोई ध्यान नहीं है जिससे कि वनों की कटाई में बढ़ोतरी हो रही है।
अवैध लाल ईंट बनाने की उद्योग में बहुत सारी लकड़ियों का उपयोग या कोयला का उपयोग किया जाता है इसमें गांव के लोग जंगल से बड़े-बड़े पेड़ों को काट के लिए आते हैं और उसे ईट पकाने में उपयोग करते हैं लगभग 10000 ईट के पीछे एक ट्रैक्टर लकड़ी लगता है और इस समय बहुत लकड़ियों को यूं ही जला दिया जाता है इसमें कच्ची और सूखी लकड़ियों का उपयोग किया जाता है
5 साल के अंदर में लाखों पेड़ कट चुके हैं इनमें से फलदार ,इमारती लकड़ी जैसे आम सागौन सराई महुआ इमली और जो मजबूत टिकने वाले लकड़ी होते हैं वह लुप्त होने की कगार पर हैं

शासन प्रशासन मौन#
शासन प्रशासन वन विभाग और लैलूंगा के बड़े-बड़े अधिकारी मौन क्यों है जिसके कारण इन लाल ईंटों का गोरख धंधा बड़े पैमाने चल रहा है शासन की निर्देशानु पर लाल ईंटों उपयोग सरकारी भवन पर पूर्ण रूप से बंद है फिर भी लाल ईंटों का उपयोग हो रहा है। राज्य शासन के आदेशों के खुलेआम धज्जियां उड़ रही।एक तरफ सरकार अवैध खनन और जंगलों की कटाई पर रोक लगाने के लिए बड़े-बड़े दावे करती है वन विभाग और राजस्व अधिकारी के उचित कार्रवाई नहीं करने के कारण लाल ईंटों के माफियाओं का हौसला बढ़ा हुआ है अगर शासन समय रहते जल्दी इन पर अंकुश नहीं लगता है तो जंगल पूरी तरह साफ हो जाएगा। जिससे वातावरण दूषित होता और जीवन जीने में कठिनाई होगी।




लोकमत 24 इस मामले पर लगातार नजर रखेगा और आपको आगे की जानकारी देता रहेगा।
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