07/10/2025. विचारों के जरिए व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक 100 वर्षों का स्वर्णिम सफर। लैलूंगा मैं RSS का पथ संचलन कई बरसों से हो रहा है परंतु आज पथ संचलन लैलूंगा चौक चौराहा से होकर गुजरते ही लोगों की भीड़ देखते ही बनती है वस्त्रों से सुसज्जित लोगों और भारत माता की जय , वंदे मातराम के नारे से पूरा लैलूंगा गुंजायमान हो रहा था । जगह जगह पर लोगों के द्वारा फूलों की वर्षा की गई।


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ंघ सौ वर्षों से व्यक्ति निर्माण के जरिए राष्ट्र निर्माण की कल्पना को साकार करने जी जान से जुटा हुआ है। आज देश भर में 83 हजार शाखाएं नियमित चलती है । शाखाओं की भूमि में बहने वाला पसीना हर स्वयं सेवक को खरे सोने में तब्दील करता है। स्वयं सेवकों के लिए शाखाये व्यक्ति निर्माण और चरित्र निर्माण की पाठशाला है। आजादी की लड़ाई में भी संघ की सहभागिता रही हैं।डॉक्टर हेडगेवार जी के साथ बहुत से स्वयं सेवकों ने आजादी के लिए लड़ाई में भाग लिया। संघ के सौ वर्षों के सफर को देखा जाए तो यह बात प्रमाणित हो जाएगी कि सत्य की राह कितनी कठिन होती है। संघ की विचारधारा को कुचलने के बहुतेरे प्रयास हुए संघ को प्रतिबंध का सामना करना पड़ा लेकिन हर विषम परिस्थिति गुजरने के बाद संघ अधिक मजबूती से राष्ट्र निर्माण के लक्ष्य में जुट गया। सही मायने में सेवा परमो धर्म का मूल मंत्र संघ की कार्यपद्धति में शामिल रहा। जब जब राष्ट्र के सामने संकट आया तब तब स्वयं सेवक जान की परवाह किए बिना जी जान से सेवा में जुटे और मानवता की अदभुत मिशाल पेश की है। देश के किसी भी कोने में आपदा या विपत्ति आए संघ से जुड़े कार्यकर्ता वहां अवश्य मिलेंगे। यही स्वयं सेवकों की असली पहचान है। संघ से जुड़े अन्य संस्थान वनवासी कल्याण आश्रम,एकल विद्यालय, विद्या भारती, सेवा भारती, आदिवासी समाज से जुड़े लोगो के लिए निरंतर जुटे हुए है। 100 वर्षों की इस वैचारिक सफर में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने हर भारतीय में राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत करने में सफलता पाई है।





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