19/12/2025. ●●●●लैलूंगा में ऐतिहासिक जोश के साथ मनी गुरु घासीदास जयंती
श्रद्धा, अनुशासन और सामाजिक चेतना का दिखा विराट संगम**


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ैलूंगा। क्षेत्र में जयंती इस वर्ष अभूतपूर्व उत्साह और अनुशासन के साथ मनाई गई। सुबह से ही नगर और ग्रामीण अंचल में जयंती की गूंज सुनाई दी। प्रभात फेरी, जयघोष और भजन-कीर्तन के बीच हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे, जिससे पूरा लैलूंगा सतनाम के संदेश से सराबोर नजर आया।
जयंती समारोह के दौरान वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि “मनखे-मनखे एक समान” का सिद्धांत आज के दौर में सामाजिक विषमता और भेदभाव के खिलाफ सबसे मजबूत आवाज है। मंच से समानता, सत्य और मानवता पर आधारित विचार रखे गए, वहीं युवाओं और महिलाओं की उल्लेखनीय भागीदारी ने कार्यक्रम को नई ऊर्जा दी।
अनुशासन, संस्कृति और चेतना का संगम
कार्यक्रम में सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया। पारंपरिक नृत्य, गीत और नाट्य रूपांतरणों के माध्यम से गुरु घासीदास जी के विचारों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। आयोजन स्थल पर शांतिपूर्ण अनुशासन, स्वच्छता और व्यवस्थाओं की सराहना भी होती रही।
सामाजिक संदेश के साथ समापन
अंत में सामूहिक प्रसाद वितरण हुआ और समाज के वरिष्ठजनों ने एक स्वर में सामाजिक एकता, नशामुक्ति और शिक्षा पर जोर दिया। आयोजकों ने स्पष्ट किया कि यह जयंती केवल उत्सव नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का संकल्प है, जिसे वर्ष भर जन-जन तक पहुँचाया जाएगा।
कुल मिलाकर, लैलूंगा में गुरु घासीदास जयंती श्रद्धा से आगे बढ़कर चेतना का पर्व बनकर उभरी—जिसने क्षेत्र को एकजुटता और समानता का स्पष्ट संदेश दिया






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