Breaking News
Thu. May 14th, 2026

*“गब्बर फाइल्स — अब सच दबेगा नहीं… दर्ज होगा।” – अकील

शेयर करें

13/05/2026 💥💥“गब्बर फाइल्स — अब सच दबेगा नहीं… दर्ज होगा।” – अकील

सामाजिक कार्यकर्ता एवं असिस्टेंट प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी ने शुरू की “गब्बर फाइल्स” की पहल, डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जवाबदेही तय करने का दावा

रायपुर / अम्बिकापुर । विशेष रिपोर्ट

व्यवस्था की खामियों, भ्रष्टाचार, प्रशासनिक लापरवाही और आम जनता की अनसुनी शिकायतों के बीच एक नई डिजिटल जन-पहल सामने आई है। सामाजिक कार्यकर्ता एवं असिस्टेंट प्रोफेसर अकील अहमद अंसारी ने अपने फेसबुक वाल के माध्यम से “गब्बर फाइल्स — सच का डिजिटल रिकॉर्ड” नामक एक वैधानिक डिजिटल मंच शुरू करने की घोषणा की है।
इस पहल का उद्देश्य आम जनता, पीड़ित व्यक्तियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, पत्रकारों, कर्मचारियों और ईमानदार अधिकारियों को एक ऐसा मंच उपलब्ध कराना बताया गया है, जहाँ वे जनहित से जुड़े दस्तावेज़, शिकायतें और डिजिटल साक्ष्य साझा कर सकें।
“सबसे ज्यादा परेशान आम आदमी”
अपने विस्तृत पोस्ट में अकील अहमद अंसारी ने वर्तमान व्यवस्था की कई गंभीर समस्याओं का उल्लेख किया है। उन्होंने लिखा कि आज देश का आम आदमी रोज़ सिस्टम से लड़ रहा है। कहीं सड़कें कागज़ों में बन जाती हैं लेकिन ज़मीन पर टूटी रहती हैं, कहीं अस्पतालों में इलाज नहीं, तो कहीं स्कूलों में शिक्षा का स्तर कमजोर है।
उन्होंने यह भी कहा कि बिना रिश्वत कई लोगों का काम नहीं हो पा रहा, कई लोग झूठे मामलों, ज़मीन फर्जीवाड़े, सरकारी लापरवाही और निजी संस्थाओं की मुनाफाखोरी से परेशान हैं। पोस्ट में यह सवाल भी उठाया गया कि आखिर आम जनता अपनी शिकायत लेकर जाए तो कहाँ जाए?
“ईमानदार अधिकारी भी परेशान”
पोस्ट में केवल जनता की समस्याओं का ही उल्लेख नहीं किया गया, बल्कि सिस्टम के भीतर कार्यरत ईमानदार कर्मचारियों और अधिकारियों की परेशानियों को भी सामने लाने की कोशिश की गई है।
अकील अहमद अंसारी ने लिखा कि कई विभागों में स्टाफ पॉलिटिक्स, चमचागिरी, गलत लोगों का प्रभाव, ईमानदार लोगों पर दबाव और ऊपर से नीचे तक दलाली जैसी स्थितियाँ बनी हुई हैं। कई अधिकारी और कर्मचारी सच जानते हैं, लेकिन अकेले पड़ जाने या प्रताड़ना के डर से सामने नहीं आ पाते।
क्या है “गब्बर फाइल्स”?
“गब्बर फाइल्स” को एक “वैधानिक डिजिटल जनमंच” बताया गया है। इसके माध्यम से —
आम जनता अपनी शिकायत दर्ज करा सकेगी
पीड़ित व्यक्ति अपनी बात और साक्ष्य साझा कर सकेंगे
कर्मचारी और अधिकारी गोपनीय रूप से तथ्य उपलब्ध करा सकेंगे
दस्तावेज़ों और डिजिटल साक्ष्यों का प्रारंभिक सत्यापन किया जाएगा
वैधानिक और तथ्यात्मक जांच के बाद संबंधित विभागों को सक्रिय करने का प्रयास होगा
जनहित के मामलों को सार्वजनिक विमर्श तक पहुंचाया जाएगा
पोस्ट में यह भी कहा गया है कि जो कर्मचारी और अधिकारी ईमानदारी से काम कर रहे हैं, उनके अच्छे कार्यों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाएगा, जबकि जनहित के खिलाफ कार्य करने वालों को दस्तावेज़ों और कानून के आधार पर जवाबदेह बनाने की कोशिश होगी।
पहचान गोपनीय रखने का दावा
इस पहल में शिकायतकर्ता की पहचान सुरक्षित रखने की बात भी कही गई है। पोस्ट के अनुसार कोई व्यक्ति चाहे तो सीधे संपर्क कर सकता है या गोपनीय रूप से जानकारी साझा कर सकता है। हर स्थिति में उसकी पहचान सुरक्षित रखने का प्रयास किया जाएगा।
साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि यह मंच किसी भी प्रकार की निजी हिंसा, धमकी, उगाही या गैर-कानूनी गतिविधि का समर्थन नहीं करेगा। पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक मर्यादा के दायरे में संचालित करने का दावा किया गया है।
सोशल मीडिया पर मांगी जनता की राय
फेसबुक पोस्ट में लोगों से यह भी पूछा गया है कि क्या वे “सिस्टम में रहकर सिस्टम की सफाई” की शुरुआत चाहते हैं? क्या वे चाहते हैं कि केवल वायरल वीडियो नहीं, बल्कि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर जवाबदेही तय हो?
इसी के साथ लोगों से इस मुहिम पर अपनी राय देने और इसे अधिक से अधिक साझा करने की अपील की गई है।
पोस्ट के अंत में एक संदेश विशेष रूप से लिखा गया है —
“गब्बर फाइल्स — अब सच दबेगा नहीं… दर्ज होगा।” – अकील अहमद अंसारी



लोकमत 24 इस मामले पर लगातार नजर रखगा और आपको आगे की जानकारी देता रहेगा।

लैलूंगा अस्पताल में वसूली और भ्रस्टाचार की जानकारी देनें के लिए संपर्क करें |
प्रधानमंत्री आवास योजना में हो रहे भ्रष्टाचार और घूसघोरी की जानकारी देने के लिए संपर्क रें

शेयर करें

By Rakesh Jaiswal

Lokmat24 News  एक विश्वसनीय न्यूज़ प्लेटफॉर्म है जो आपको छत्तीसगढ़ की ताज़ा और सटीक ख़बरें प्रदान करता है। हमारा उद्देश्य सच्चाई को आप तक पहुंचाना है | Contact - 9424188025

Related Post