09/06/2026 💥💥खाद्य निरीक्षक की शह पर लैलूंगा विकासखंड में गरीबों के राशन की व्यापक हेराफेरी का आरोप

लैलूंगा- छत्तीसगढ़ शासन द्वारा गरीब एवं पात्र हितग्राहियों को तीन माह का निःशुल्क राशन एकमुश्त उपलब्ध कराने की योजना पर लैलूंगा विकासखंड में गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। क्षेत्र की कई ग्राम पंचायतों से शिकायतें सामने आई हैं कि हितग्राहियों को कहीं केवल एक माह तो कहीं दो माह का ही चावल वितरित किया गया, जबकि शासन के निर्देशानुसार तीन माह का राशन दिया जाना था।
जानकारी के अनुसार, नागरिक आपूर्ति निगम (नान) से अधिकांश उचित मूल्य दुकानों के लिए लगभग तीन माह के चावल का उठाव किया जा चुका है। इसके बावजूद कई पंचायतों में न तो तीन माह का राशन वितरित किया गया है और न ही दुकानों में कोई शेष स्टॉक मौजूद है। ऐसे में बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि नान से उठाव किया गया राशन आखिर गया कहाँ?
स्थानीय लोगों का आरोप है कि राशन वितरण व्यवस्था में बड़े पैमाने पर अनियमितता बरती गई है। मामले में अनुबंधित परिवहनकर्ता (ट्रांसपोर्टर) की भूमिका को लेकर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है। लोगों का कहना है कि बिना विभागीय अधिकारियों की जानकारी के इतनी बड़ी मात्रा में राशन की गड़बड़ी संभव नहीं है।
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि खाद्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता एवं निगरानी के अभाव के कारण गरीबों के हिस्से का अनाज गायब हो रहा है। आरोप है कि लंबे समय से जमे विभागीय अधिकारियों की कार्यप्रणाली के कारण राशन वितरण व्यवस्था प्रभावित हो रही है और पात्र हितग्राहियों को शासन की योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों एवं जनप्रतिनिधियों ने मामले की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की है। यदि शिकायतें सही पाई जाती हैं तो यह गरीबों के अधिकारों पर सीधा प्रहार माना जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि प्रशासन इस गंभीर मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और गरीबों के राशन की कथित हेराफेरी पर क्या कार्रवाई होती है।




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