24/09/2025. लैलूंगा शारदीय नवरात्र के तीसरे दिन अंचल के नव मित्र मंडल दुर्गा पंडाल और राधाकृष्ण दुर्गा पंडाल और देवी मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की भीड़ लगी रही। साथ ही कई लोग अपने घर में भी माता की चौकी रखकर पूजा कर रहे हैं। इस दौरान बुधवार को माता के दूसरा रूप मां चंद्रघंटा की धूमधाम से पूजा-अर्चना की गई, साथ ही कई मंदिरों में मंगल पाठ का भी आयोजन किया गया था, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं शामिल होती है।



शारदीय नवरात्र को लेकर इन दिनों लैलूंगा सहित पूरा अंचल भक्तिमय हो गया है। ऐसे में सुबह से लेकर देर शाम तक देवी मंदिरों में कहीं माता के गीत के साथ मादर की थाप सुनाई दे रही है तो कहीं मंगल पाठ का आयोजन चल रहा है। साथ ही नौ दिनों तक चलने वाले शक्ति की भक्ती के पर्व को लेकर लोगों में काफी उत्साह देखा जा रहा है। इससे शहर सहित ग्रामीण अंचलों में इसका माहौल देखने को मिल रहा है, वहीं पंडित परमानंद शास्त्री ने बताया कि नवरात्र के नौ दिन बहुत विशेष होता है। इस कारण अलग-अलग दिन अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है, इन नौ रूपों का एक अलग ही महत्व हैं। उन्होंने बताया कि वेदों के अनुसार ब्रह्म का अर्थ है तपस्या और चारिणी का अर्थ है आचरण। ऐसे में मां ने भगवान शंकर को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए घोर तपस्या की थी। इस कठिन तपस्या के कारण इस देवी को ब्रह्मचारिणी नाम से अभिहित किया गया है। इनकी विधि-विधान से अराधना करने से भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
आज होगी मां चंद्रघंटा की पूजा
नवरात्र के तीसरे बुधवार को मां चंद्रघंटा की आराधना की जाएगी, इसको लेकर एक दिन पहले ही सभी तैयारियों पूर्ण कर ली गई है, इससे सुबह से मां चंद्रघंटा की अराधना शुरू हो जाएगी। इस संबंध में वेदों के अनुसार मां का यह रूप बेहद ही सुंदर, मोहक और अलौकिक है। चंद्र के समान सुंदर मां के इस रूप से दिव्य सुगंधियों और दिव्य ध्वनियों का आभास होता है। मां का यह स्वरूप परम शांतिदायक और कल्याणकारी है। इनके मस्तक में घंटे का आकार का अर्धचंद्र है इसलिए इन्हें चंद्रघंटा देवी कहा जाता है।


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