29/05/2026 💥*कृषि केंद्रों में किसानों की लंबी कतारें, लैलूंगा के सरपंच संघ अध्यक्ष शिव प्रकाश भगत ने लगाया कालाबाजारी का आरोप*

*लैलूंगा* लैलूंगा में खरीफ सीजन की तैयारी के बीच किसानों को खाद-बीज और अन्य कृषि आदानों के लिए भटकना पड़ रहा है। कृषि सेवा केंद्रों में सुबह से ही किसानों की लंबी-लंबी कतारें लग रही हैं, वहीं दूसरी ओर छोटे-छोटे निजी दुकानों पर समर्थन मूल्य से अधिक दाम वसूलने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसी मुद्दे को लेकर लैलूंगा सरपंच संघ के अध्यक्ष शिव प्रकाश भगत ने प्रशासन पर गंभीर लापरवाही और कालाबाजारी को संरक्षण देने का आरोप लगाया है।
*”किसान घंटों खड़े, फिर भी खाली हाथ लौट रहे”*
शिव प्रकाश भगत ने कहा कि शासन की मंशा किसानों को समय पर सस्ती दर पर कृषि सामग्री उपलब्ध कराना है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। उन्होंने बताया कि ब्लॉक के अधिकांश कृषि केंद्रों में सुबह 6 बजे से ही किसान अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। स्टॉक की कमी और स्टाफ की उदासीनता के कारण कई किसान घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटने को मजबूर हो रहे हैं।
उन्होंने कहा, “एक तरफ सरकार कहती है कि किसान को राहत देंगे, दूसरी तरफ केंद्रों में व्यवस्था इतनी बदहाल है कि किसान धूप में खड़े-खड़े बेहाल हो रहे हैं। यह स्थिति सीधे तौर पर प्रशासन की विफलता को दर्शाती है।”
*समर्थन मूल्य से अधिक वसूली का आरोप*
सरपंच संघ अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जब सरकारी केंद्रों में माल नहीं मिलता, तो मजबूर किसान निजी दुकानों का रुख करते हैं। वहां यूरिया, डीएपी और बीज जैसे जरूरी आदान समर्थन मूल्य से 100 से 200 रुपये अधिक में बेचे जा रहे हैं।
“छोटी दुकानों पर खुलेआम कालाबाजारी हो रही है। 267 रुपये की यूरिया की बोरी 400 रुपये में बेची जा रही है। गरीब किसान मजबूरी में खरीद रहा है, क्योंकि खेती का समय निकल जाएगा तो पूरे साल का नुकसान हो जाएगा,” उन्होंने कहा।
*प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग*
सरपंच शिव प्रकाश भगत का कहना है कि जिला प्रशासन से और कृषि विभाग से मांग है कि तत्काल अतिरिक्त स्टॉक उपलब्ध कराकर सभी कृषि केंद्रों में पर्याप्त व्यवस्था की जाए। साथ ही उन्होंने निजी दुकानों पर छापेमारी कर ओवररेटिंग करने वाले व्यापारियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की।
*किसानों की व्यथा*
किसानों को लेकर लैलूंगा सरपंच संघ के अध्यक्ष शिवप्रकाश भगत का फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट में लिखा सुबह लंबी लाइन से खड़े हैं, लेकिन अब तक नंबर नहीं आया। “घर में खेती का काम रुका है। अगर समय पर बीज-खाद नहीं मिला तो फसल बुआई लेट हो जाएगी। ऊपर से दुकान वाले मनमाना दाम मांग रहे हैं,” उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा।
राज्य सरकार हर साल खरीफ और रबी सीजन से पहले किसानों को रियायती दर पर खाद-बीज उपलब्ध कराने का दावा करती है। लेकिन हर साल की तरह इस बार भी वितरण व्यवस्था और कालाबाजारी के आरोपों ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर आपूर्ति न होने से न केवल उत्पादन प्रभावित होता है, बल्कि किसान कर्ज के जाल में भी फंसते हैं।
फिलहाल सरपंच संघ के इस बयान के बाद प्रशासन पर दबाव बढ़ गया है। अब देखना होगा कि प्रशासन किसानों की इस समस्या का समाधान कब तक निकाल पाता है।




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